शैक्षिक कार्य

गुरुजनों का प्रिय

हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई डी. ए. वी. इण्टर कॉलेज, मऊ में हुई । वहां से दसवीं और बारहवीं प्रथम श्रेणी में (गणित एवं साइंस के विषयों में डिस्टिंक्शन के साथ) पास किया ।

हायर सेकेंडरी के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय गया (Oxford of the East) ! जहां से स्नातक (BA – पॉलिटिकल साइंस, फिलोसोफी  एवं इकॉनॉमिक्स में) प्रथम श्रेणी में एवं परा स्नातक (पॉलिटिक्स) का कोर्स प्रथम श्रेणी में तथा द्वितीय टॉपर के रूप में पूरा किया ।

UGC के फेलो के रूप में डी फील में अपने विभागाध्यक्ष के मार्गदर्शन में रिसर्च भी किया । इस दौरान मुझे विभाग में पढ़ाने का अवसर भी मिला ।

विश्वविद्यालय के जीवन में मुझे ग़ज़ल सुनने और लिखने का शौक था । जगजीत एवं चित्रा सिंह की गाई हुई ग़ज़लें खास पसंद थीं । विद्यार्थी जीवन के संघर्ष के समय में कई गज़लें बड़ी प्रासंगिक लगती थीं, जैसे –

ऐ ख़ुदा रेत के सहरा को समंदर कर दे; मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर कर दे ।

हम लोग विश्वविद्यालय में नाट्य- नाटिका भी करते रहते थे । मुझे याद है कि एक बार अपने विभाग में ही हरिशंकर परसाई के पुलिस के ऊपर व्यंग ‘ इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर’ का नाट्य मंचन किया गया, जिसमें मैंने इंस्पेक्टर मातादीन की प्रमुख भूमिका निभाई थी । 

नाट्य मंचन के बाद एक प्रोफेसर ने मुझे बधाई देते हुए कहा कि ‘तुम एक अच्छे इंस्पेक्टर बनोगे’ तुरंत हमारे विभागाध्यक्ष स्वर्गीय श्री जैन साहब ने उनकी बात काटते हुए कहा था  “इंस्पेक्टर क्यों ? वो इंस्पेक्टर जनरल बनेगा ” । यह MA फाइनल वर्ष की बात है ।

MA पूरा होने के बाद जब मैं आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा था, उन दिनों में एक शाम को अपने विभागाध्यक्ष जी से मिलने चला गया । सर्वप्रथम तो उन्होंने बहुत दिन तक नहीं मिलने पर डांट लगाई । उसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या मैं विश्वविद्यालय में पढ़ाना चाहूंगा । पहले तो मैं समझा नहीं फिर उन्होंने समझाया कि यदि मैं इच्छुक हूं तो पढ़ाने के लिए जगह है और मेरे लिए विचार हो सकता है । अगले ही दिन से मैं राजनीति विभाग में फैकल्टी बन गया और ‘भारतीय संविधान सहित राजनैतिक ढांचा ‘ पढ़ाने लगा । आईएएस में मेरा चुनाव होने के बाद भी माननीय जैन साहब ने मुझे विभाग में रोकने की कोशिश की । जब मैं नहीं माना तो उन्होंने कहा, अच्छा ठीक है जाओ लेकिन जब कभी आना चाहो आ सकते हो !

प्रयाग विश्वविद्यालय एवं UPSC परीक्षा की तैयारी के दिन मेरे पिताजी के अहर्निश समर्थन एवं स्वार्पण तथा मेरी विधवा स्वर्गवासी बुआ जी का हम लोगों पर अविभाजित ध्यान, मेरे दोनों छोटे भाइयों का समर्पण और एक अपरिचित दिव्यात्मा के स्वार्थ रहित सहयोग से आच्छादित रहे । मेरी पढ़ाई एवं सिविल सर्विस परीक्षा में सफलता तीर्थ राज प्रयाग की देन है । विशेष करके यहाँ के दोनों हनुमान मंदिरों (सिविल लाइन्स एवं संगम के लेटे हनुमान जी) का, माँ दुर्गा की विशेष कृपा एवं माँ विंध्यवासिनी तथा मैहर की माँ शारदा का आशीर्वाद रहा है । मेरे जीवन में प्रयाग का प्रभाव अपार रहा है: को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ ।

वर्ष १९८८ के मध्य में आईएएस में चुनाव हुआ और मैंने विश्व विद्यालय छोड़ दिया ।  वर्ष २००६ में मैंने ऑस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी, कैनबेरा से मास्टर ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी का (MPP) का कोर्स  किया । इसमें अंतरराष्ट्रीय नीति में ख़ास पढ़ाई की एवं समग्र कोर्स मेरिट के साथ तथा सभी पेपर्स में डिस्टिंक्शन / उच्च डिस्टिंक्शन के साथ पास किया । मैं भाग्यशाली रहा हूँ कि मुझे अपने शिक्षकों एवं गुरुजनों का असीम प्यार एवं मार्गदर्शन मिला ।

उन सबको नमन !

मन्त्रमूलं गुरुर्वाक्यं
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