जन सेवा

सुशासन ही जीवनी शक्ति है

वर्ष 1988 में IAS में शामिल हुआ ।

दो साल की ट्रेनिंग के बाद गुजरात राज्य में नियुक्ति हुई । नौकरी के 32 वर्षों में सामान्य आदमी से जुड़े रहने का प्रयास रहा । मैं यह भी मानता हूं कि लोगों को सुनना न सिर्फ संबंधित व्यक्ति को संतोष देता है बल्कि अधिकारी के ज्ञान में भी वृद्धि करता है और उसे नैतिक शक्ति भी प्रदान करता है ।

विकास या प्रशासन के क्षेत्र में नीचे के स्तर पर या ऊपर के स्तर पर जहां भी मैंने काम किया, वर्तमान व्यवस्था को सुधारने, कुछ नया करने एवं प्रशासन को बेहतर बनाने और सामान्य व्यक्ति, विशेष कर गरीबों, की भलाई करने की दिशा में काम किया ।

जैसा बशीर बद्र की बात में आता है:

किताबेंरिसाले न अख़़बार पढनामगर दिल को हर रात इक बार पढ़ना

मेरी पहली नियुक्ति गुजरात के भावनगर जिले के पालिताणा के सहायक कलेक्टर एवं Sub Divisional Magistrate (SDM) के रूप में हुई । यह क्षेत्र गुजरात के तत्कालीन राजस्व मंत्री जी का हुआ करता था । उस समय इस क्षेत्र में भयंकर सूखे की परिस्थिति व्याप्त थी । माननीय राजस्व मंत्री जी न सिर्फ हमारे विभाग के मंत्री होते थे, बल्कि सूखे से निपटना भी उनके ही कार्य क्षेत्र में आता था । इसलिए स्वाभाविक रूप से उनकी व्यक्तिगत निगरानी मेरे कैरियर के शुरुआती दिनों में रहती थी । मैं खुशनसीब था कि वो मुझे बहुत प्यार भी करते थे ।

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री जो बड़ौदा जिले से आते थे, पदोन्नति सहित दूसरी पोस्टिंग के लिए उनके जिले बड़ौदा में 2 वर्ष से ज्यादा समय जिला (मुख्य) विकास अधिकारी रहा । इस कार्यकाल में मुझे राज्य के सर्वश्रेष्ठ मुख्य विकास अधिकारी का पुरस्कार भी मिला ।

तत्पश्चात, जिला मजिस्ट्रेट मेहसाणा के रूप में मेरी नियुक्ति हुई, वहां भी मैं 2 साल से ज्यादा समय तक कार्यरत रहा । उसके बाद दो और जिलों- खेड़ा और आनंद में भी जिला मजिस्ट्रेट रहा ।

IAS अधिकारी के रूप में इन सभी जमीनी कार्यकालों के दरम्यान मैं आम जनता के लिए हमेशा सुलभ रहा । यह मेरा स्वभाव था । इतना ही नहीं बल्कि मुझे इस बात में दृढ़ विश्वास था कि इससे अधिकारी को बहुत सारा ज्ञान एवं समझ मिलती है ।

सचिवालय स्तर पर दो कार्यकाल रहे:

राज्य स्तर पर कार्य करने के शुरुआती अवसर में वित्त विभाग का उप सचिव एवं ब्यूरो ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज का इंचार्ज तथा गुजरात सरकार की नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (GSFS) का मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर लगभग डेढ़ साल रहने का अवसर मिला । इस दरम्यान पब्लिक सेक्टर के आर्थिक सुधार (Reform) हेतु एशिया विकास बैंक (ADB) के ऋण पर आधारित सुधारों की प्रक्रिया का कार्य किया ।

8 अक्टूबर 2001 के बाद:

यही वह दिन था जब माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला । इसी दिन से मेरी नौकरी की ही नहीं मेरे जीवन की बागडोर भी उनके ही हाथों में चली गयी । इसी दिन मेरी नियुक्ति मुख्यमंत्री के सचिव के पद पर हुई ।

उसके बाद जो भी मैंने किया या जो भी मेरे द्वारा हुआ, वह पूर्ण रूप से उनकी इच्छा एवं मार्गदर्शन के अनुसार और उन्हीं के आशीर्वाद से हुआ ।

वे अपने मातहतों को काम करने की संपूर्ण छूट देते हैं, जिसमें प्रयोग करना एवं नवीनीकरण लाना भी शामिल है ।

मुख्यमंत्री कार्यालय में मैं सबसे कनिष्ठ आईएएस अधिकारी था । वहां मैं उद्योग, खान-खनिज, राजस्व, वन-पर्यावरण,  शिक्षा, पर्यटन रोड-बिल्डिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विभाग और विषय देखता था । मुख्यमंत्री कार्यालय का आतंरिक प्रशासन एवं माननीय मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम भी मैं देखता था ।

हमने इन्हीं दिनों मुख्यमंत्री जी की प्रेरणा से उनके कार्यालय को ISO प्रमाण पत्र भी दिलवाया जो किसी राजनैतिक मुखिया के लिए नयी बात थी ।

२००१ से २०१४ तक मैं मुख्यमंत्री के सचिव के साथ उद्योग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विशेष कार्य भी संभालता रहा (iNDEXTb, GIDB) । इस भूमिका में गुजरात में होने वाले बड़े निवेश जैसे की टाटा नैनो, सुज़ुकी एवं फोर्ड के शुरुआती बातचीत एवं कार्यान्वयन से भी जुड़ा रहा ।

मेरे इलाहाबाद विश्वविद्यालय का घोष वाक्य था जितनी शाखाएं उतने वृक्ष अर्थात् कमजोर एवं छोटे को बड़ा और मजबूत बनाना यह हमारी प्रमुख विचारधारा में है ।

‘लोकाःसमस्ताःसुखिनोभवन्तु’
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