टेक्नोलॉजी का शौक

ई-गवर्नेंस का श्रेष्ठतम उपयोग

टेक्नोलॉजी का उपयोग करके ई-गवर्नेंस के श्रेष्ठ प्रयोग किए गए । मैं इंटरनेट का उपयोग उस समय करता था, जब यह एक बहुत ही अजूबी चीज थी । 1993 में बड़ौदा के जिला विकास अधिकारी के रूप में मैं उस समय टेलीफ़ोन से कनेक्ट होने वाले मॉडम का प्रयोग करके इंटरनेट का उपयोग करता था । उस समय भी मैं लोगों की शिकायतें दूर करने और उनकी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग को सुलभ मानता था ।

IAS अधिकारी के कार्यकाल के दरम्यान 3 दशकों के अनुभव से कह सकता हूं कि सामान्य आदमी की सुनवाई न होना सरकारी तंत्र की एक बड़ी समस्या हमेशा से रही है ।

दुष्यन्त कुमार की भाषा में कहें तो “वो आदमी मिला था मुझे उसकी बात से, ऐसा लगा कि वो भी बहुत बे–ज़बान है ।”

कई बार सामान्य व्यक्ति गुस्से में या निराशा में अधिकारी या पदाधिकारी के सामने अपना आपा खो बैठता है । उसकी पुकार होती है मैं कहां जाऊं

इसलिए मेरा प्रयास हमेशा ही रहा है कि हम नवीनताओं को अपनाकर, नई पद्धतियों से ऐसे लोगों की मदद करें ।

हम ऐसा नहीं करेंगे तो वही होगा जो कैफी आज़मी ने कहा है और कुछ देर पुकारूंगा चला जाऊंगा

ऐसे लोगों के प्रति संवेदना मेरी कमजोरी रही है । मैंने जहां भी काम किया विशेष रूप से कमजोर व्यक्तियों या वर्गों को आवाज़ देने का काम किया । सरकारी तंत्र में रहते हुए, उन्हीं शक्तियों का उपयोग करते हुए सरकार के अंगों को ऐसे लोगों के सेवा में लगाने का प्रयास किया ।

सामान्य आदमी की शिकायतों पर ध्यान दिया और उनके निवारण के लिए विशेष व्यवस्था खड़ी करने का प्रयास किया । जिनमें शामिल है गुजरात में स्वागत नाम की व्यवस्था, प्रधानमंत्री कार्यालय में ‘प्रगति’ नाम की व्यवस्था, एमएसएमई मंत्रालय में ‘चैम्पियंस’ नाम की व्यवस्था एवं साथ ही ‘उद्यम’ की नई व्यवस्था जो सरलीकरण का उदाहरण बन चुकी है । इस दिशा में हमने जो कुछ आविष्कार किए उनमें से कुछ को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिला । उनका उल्लेख निम्नलिखित हैः

SWAGAT (स्वागत):-  Statewide Attention on Grievances by Application of Technology

गुजरात के तत्कालीन माननीय मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सरकारी तंत्र से आम आदमी की दूरी को बहुत पहले ही पहचान लिया था । उन्होंने 2003 में ये बात कही थी कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों की शिकायतें सुनना बहुत आवश्यक है । उनकी इन्हीं भावनाओं के अनुरूप एवं उनके मार्गदर्शन तथा आशीर्वाद से SWAGAT (स्वागत) कार्यक्रम की शुरुआत की गई । जिसमें जन-शिकायतों को असरदार ढंग से सुना जाता है । इस कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र का वर्ष 2010 के लिए पब्लिक सर्विस पुरस्कार भी मिला । जिसमें विशेष रूप से इसके द्वारा लाई जाने वाली पारदर्शिता और जबावदेही का उल्लेख है । इतना ही नहीं इसी वर्ष 2010-11 में भारत सरकार द्वारा नेशनल ई-गवर्नेंस ऑवार्ड भी मिला ।

SWAGAT (स्वागत) कार्यक्रम की प्रमुख भूमिका के मद्देनज़र गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय को ISO CERTIFICATE भी मिला । यह कार्यक्रम आज भी गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यान्वित है । माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी इससे इतने जुड़े हुए थे कि 2007 एवं 2012 के विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री के रूप में पुनः शपथ लेने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी जी का पहला कार्यक्रम SWAGAT (स्वागत) में लोगों को सुनना ही था । (https://swagat.gujarat.gov.in)

PRAGATI (प्रगति):- Pro-Active Governance And Timely Implementation

जैसे ही माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी भारत के प्रधानमंत्री बने और मैं भी प्रधानमंत्री कार्यालय में आया, तुरंत ही उन्होंने SWAGAT (स्वागत) की तर्ज पर एक व्यवस्था प्रधानमंत्री कार्यालय में खड़ी करने का निर्देश दिया । उसी निर्देश के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय में PRAGATI (प्रगति) नाम की व्यवस्था खड़ी की गई । PRAGATI (प्रगति) कार्यक्रम SWAGAT (स्वागत) से भी एक कदम आगे जाकर सामान्य व्यक्ति की शिकायतें जो सरकारी विभाग से संबंधित होती हैं, उनका राष्ट्रीय स्तर पर आंकलन करके निराकरण करने के अलावा देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की मॉनिटरिंग एवं कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा भी करता है । जो केंद्र सरकार या राज्य सरकारों से संबंधित होती हैं ।

एक IAS अधिकारी जो अर्थशास्त्री भी हैं और जिन्होंने कुछ समय प्रधानमंत्री कार्यालय में काम किया, वो कई बार कहते थे कि PRAGATI (प्रगति) के कारण देश की जीडीपी में 1.5 से 2% का इजाफा हो रहा है । (https://www.pmindia.gov.in)

CHAMPIONS (चैम्पियन्स):- Creation and Harmonious Application of Modern Processes for Increasing the Output and National Strength

कोविड-19 के कारण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को काफी नुकसान झेलना पड़ा । इनके ऊपर आधारित लोगों की आजीविका का प्रश्न भी खड़ा हुआ । उसी समय मैंने इस मंत्रालय के सचिव के रूप में कार्यभार संभाला । छोटे उद्यमों की शिकायतों को सुनने एवं उन्हें खत्म करने की भावना से और उनकी बेहतरी के प्रयासों को गति देने के इरादे से CHAMPIONS (चैम्पियन्स) पोर्टल की शुरुआत की गई । जिसका औपचारिक उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री जी ने 1 जून, 2020 को किया । (https://www.champions.gov.in)

इस ऑनलाइन व्यवस्था के तहत दिल्ली सहित देश के 70 स्थानों पर मंत्रालय के संस्थानों में हब एवं स्पोक की तर्ज पर कन्ट्रोल रूम शुरू किए गए हैः-

उद्यम (UDYAM) रजिस्ट्रेशन:- 

सरकार की नई नीति के अनुसार 1 जून, 2020 से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम की परिभाषा में परिवर्तन किया गया । उसके तहत उद्यम रजिस्ट्रेशन की एक नई व्यवस्था खड़ी की गई, जो 1 जुलाई, 2020 से कार्यान्वित है । उद्यम रजिस्ट्रेशन की यह नई व्यवस्था बहुत ही अलग है । जिसमें किसी भी प्रमाण या कागज की आवश्यकता नहीं है । रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में कोई दस्तावेज अपलोड करने की भी आवश्यकता नहीं है । उद्यम में जो निवेश हुआ है एवं उद्यम के द्वारा किए जाने वाले व्यापार से सम्बंधित सारी जानकारियां पोर्टल के माध्यम से Income Tax एवं GST के व्यवस्था एवं प्रणाली के साथ Integration करके ऑनलाइन ढंग से आपो-आप मिल जाती है ।(https://udyamregistration.gov.in)

उद्यमों को अपना सामान सरकार में बेचने के लिए GeM पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने की आवश्यक्ता होती है । वो सुविधा भी उद्यम रजिस्ट्रेशन पर आने से छोटे उद्यमों को आसानी से मुहैया होती है ।

ये कुछ उदाहरण हैं । ऐसे अन्य भी कई प्रयास किये गए हैं ।

ऐसे ही प्रयासों के मद्देनज़र महामहिम राष्ट्रपति जी ने डिजिटल इंडिया पुरस्कार भी MSME मंत्रालय की हमारी टीम  को दिसम्बर 2020 में दिया ।

'योगः कर्मसु कौशलम्'
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