अंतिम व्यक्ति तक

गरीबों के लिए समर्पित

श्री रामचरित मानस में वर्णित राम राज्य से मैं हमेशा प्रभावित रहा हूँ । नहिं दरिद्र कोई दुखी न दीना’ – इस दिशा में हर संभव प्रयास करता रहा ।

मैंने अनुभव किया है कि सामान्य व्यक्ति को धीरज से सुनना बहुत आवश्यक है ।

सिविल सर्विस में मैंने यह पाया है कि सामान्य व्यक्ति, सामान्य आवेदक एवं हितधर्मी के साथ धीरज रखना और उनकी आवाज शान्ति एवं शालीनता से सुनना एक बहुत बड़ा गुण है । इसीलिये मां जानकी ने हनुमान जी को होहु तात बल सील निधाना का आशीर्वाद दिया था ।

यह आश्चर्य की बात नहीं कि आईएएस अधिकारियों के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी का घोष वाक्य है-

'शीलं परं भूषणम’​
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